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गोरखपुर-बाढ़ से निपटने में ‘टेट्रापोड’ बनेंगे मजबूत ढाल, B-गैप तटबंध की सुरक्षा में किया गया इस्तेमाल

नेपाल की बड़ी गंडक से निकलने वाली नारायणी की प्रचंड धारा हर साल उत्तर-प्रदेश के नेपाल बॉर्डर स्थित सीमावर्ती जिलों में भारी तबाही मचाती रही हैं। हालांकि पिछले दो सालों से सिचाई विभाग के तमाम प्रयासों की वजह से तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है। वहीं नेपाल में स्थित प्रमुख बी- गैप तटबंध के स्पर नं-12-13 के बीच नई तकनीक ट्रेटापोड का इस्तेमाल सिचाई विभाग द्वारा किया गया है। खास बात यह है कि सीमेंट और कंकरीट के मिश्रण से बनाए जाने वाले फौलादी ट्रेटापोड बाढ़ के दौरान बेहद कारगर साबित होते हैं। दरअसल तीन पैरनुमा ब्लाक में साचें में ढालकर ट्रेटापोड बनाया जाता हैं। दिलचस्प है कि एक ट्रेटापोड करीब 2 से 3 कुंतल के वजन का होता है। इस संबंध में सिचाई विभाग गंडक सर्किल-2 के एससी कामिनी कांत राय का कहना है कि दरअसल भारत के प्रमुख समुद्र तटों की सुरक्षा को लेकर ट्रेटापोड का इस्तेमाल किया जाता है। अब इसी तकनीक का प्रयोग सिचाई विभाग द्वारा किया गया हैं। तीन पैरनुमा आकार का ट्रेटापोड बाढ़ के दौरान पानी के तेज बहाव के कम करने में बेहद कारगर साबित होते हैं।  सिचाई खंड-2 महराजगंज द्वारा बी-मैप तटबंध की सुरक्षा को पुख्ता करने को लेकर ट्रेटापोड लगाने की परियोजना को संपन्न कराया गया है।

गौरतलब है कि सिंचाई खण्ड-2, महराजगंज के कार्यक्षेत्र में गण्डक नदी के दायें किनारे पर बाढ़ सुरक्षा हेतु निर्मित ए-गैप तटबंध, एबी लिंक तटबंध, बी- गैप तटबंध, लिंक तटबंध एवं नेपाल तटबंध कुल 26, 600 किमी लम्बाई का रख-रखाव व गण्डक हाईलेवल कमेटी, पटना की संस्तुतियों के आधार पर प्रस्तावित बाढ़ सुरक्षा कार्यों के निर्माण का दायित्व है। इसके साथ ही जनपद महराजगंज में 164.02 किमी0 लम्बाई में निर्मित बाँधों के रख-रखाव एवं इन पर बाढ़ सुरक्षा हेतु विभिन्न कटाव निरोधक कार्यों के निर्माण एवं उनके रख-रखाव का भी दायित्व है। खण्ड के कार्यक्षेत्र में कुल 190.62 किमी लम्बाई के तटबंध निर्मित है। जनपद महराजगंज में नेपाल राष्ट्र से आने वाली बडी गण्डक नदी, छोटी गण्डक नदी, राप्ती नदी, रोहिन नदी, चन्दन नदी, प्यास नदी प्रत्येक वर्ष बाद से जन धन को नुकसान पहुँचाती रहीं है। खासकर साल 2017-18 में भी जनपद में काफी बाढ़ आयी थी, जिससे पूर्वनिर्मित तटबंधो व कटाव निरोधक कार्यो को क्षति पहुंची थी। जबकि साल 2021 में अतिवृष्टि होने एवं नदियों के उच्चतम् जलस्तर से अधिक पानी आने के बावजूद समस्त तटबंध सुरक्षित रहे। इसी तरह साल 2022-23 की बाढ़ में खण्ड के सभी तटबंध सुरक्षित रहें।

Team BNT

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