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लखनऊ-ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में नियमों की अनदेखी,सहायक अभियंता इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल कर रहे हैं सिविल वर्क…

लखनऊ-उत्तर-प्रदेश के ग्रामीण अभियंत्रण विभाग का अजीबो-गरीब कारनामा सामने आया है। दरअसल विभाग में इन दिनों तकनीकी योग्यता के विपरीत सहायक अभियंताओं से सिविल कार्य लिए जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि तकनीकी योग्यता के अनुसार ही कार्य लेने के न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद ग्रामीण अभियंत्रण विभाग द्वारा कोर्ट के आदेशों की अनदेखी की जा रही है। ऐसे में योग्यता के विपरीत विभाग में सिविल कार्य कर रहे इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल सहायक अभियंताओं के काम की गुणवत्ता का अंदाज आसानी से लगाया जा सकता है। ताज्जुब की बात यह है कि भविष्य में किसी तरह की अनहोनी होने पर जवाबदेही किस की तय होगी इसको लेकर विभाग में कार्यरत सिविल इंजीनियर डर और सहमे हैं। जबकि जानकारी के बाद भी विभाग तकनीकी योग्यता के पैमाने पर खरा उतरने वाले अधिकारी की तैनाती करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।

सपा विधायक अतुल प्रधान की अपर मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी वायरल

इस बीच मेरठ के सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान ने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में अधिकारियों की तैनाती में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। दरअसल वायरल हो रहे सपा विधायक की चिठ्ठी में चहेते अधिकारियों को मलाईदार नियुक्ति देने के लिए नियमों की अनदेखी किए जाने की बात कही गयी है। जबकि न्यायालय द्वारा स्पष्ट आदेश है कि ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में अभियंताओं से उनकी प्राविधिक योग्यता के अनुसार ही कार्य लिए जाने के आदेश है। लेकिन आरईडी विभाग द्वारा प्राविधिक योग्यता के विपरीत कार्य लिए जा रहा है। जबकि विद्युत एवं यांत्रिकी के सहायक अभियंताओं से सिविल के निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह हैं कि विभाग द्वारा मुख्यमंत्री, त्वरित आर्थिक विकास योजना द्वारा सड़क निर्माण, विधायक निधि, सांसद निधि के निर्माण कार्य, आईटीआई का निर्माण कार्य, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों का निर्माण समेत पुल जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के कार्य कराए जा रहे हैं। ऐसे में योग्यता के विपरीत कार्य किए जाने से अधीक्षण अभियंताओं व अधिशासी अभियंताओं के द्वारा अपने अधीनस्थ विद्युत एवं यांत्रिकी के सहायक अभियंताओं एवं अवर अभियंताओं को सिविल कार्यों की जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें पूर्ण तकनीकी ज्ञान (मार्गदर्शन) नहीं दिया जा पा रहा है। जिससे भवन, सड़क, पुल का सही निमर्माण नहीं होने की पवत आशंका है। ऐसे में भविष्य में विद्युत एवं यांत्रिकी के अभियंताओं द्वारा कराए गए निर्माण कार्य कराने से किसी भी जनहानि होने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

बिहार के पुल हादसे से नहीं ले रहा सबक

गौरतलब है कि बीते कुछ सालों में गुजरात, बिहार समेत देश के कई हिस्सों में पुल गिरने से भारी जनहानि हुई है। बावजूद इसके उत्तर-प्रदेश का ग्रामीण अभियंत्रण विभाग द्वारा पूर्व की घटनाओं से सबक लेने के वजए नियमों को ताख पर रखकर योग्यता के विपरीत विद्युत और यांत्रिकी के सहायक अभियंताओं से सिविल कार्य लिया जा रहा है। जबकि न्यायालय का स्पष्ट आदेश है कि विभाग में योग्यता के अनुरूप ही अभियंताओं से कार्य लिए जाएं।

फिलहाल सपा विधायक द्वारा उठाए गए इस गंभीर मसले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव मौर्य क्या फैसले लेते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।

Team BNT

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